6 माह तक लोग समझते रहे पागल
ग्रेटर नोएडा, 6 माह से भूखा प्यासा पड़ा रहा। लोग भी उसे पागल समझकर निकल जाते। उसकी ब्यथा कोई नहीं सुनता था। लेकिन एक युवक की उसपर नजर पड़ी तो कुछ ही घंटे की मेहनत के बाद उसके परिजन भी मिल गए। बताया गया है की पिता -माता की मौत के बाद वह मानसिक संतुलन खो बैठा और घर से निकल गया। सूचना मिलने पर परिजन भी उसे लेने पहुंच गए। उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
कूड़े के ढेर में एक शख्त
ग्रेटर नोएडा के साइट-4 स्थित ग्रैंड वेनिस मॉल के सामने इंडस्ट्रियल एरिया है। इस जगह सेक्टरों और कंपनियों से निकलने वाला कूड़ा डाला जाता है। डेल्टा -1 निवासी सुनील नगर ने बताया की इस कूड़े के ढेर में कराहते हुए विकास उर्फ़ पप्पू यादव मिला था। वह मूलरूप से विहार के पटना का रहने वाला है। सुनील ने बताया की वह भूखा प्यासा पड़ा हुआ मिला था। उसके बारे में पता करने की कोशिश की गई। बातचीत के दौरान वह कुछ शब्द अंग्रेजी के बोला तो उसके जानकारी मिलने की उम्मीद बढ़ गई। काफी देर बातचीत करने के बाद में पप्पू ने एक मोबाइल नंबर दिया। उन्होंने बताया की वह ख़ास कुछ नहीं बता पा रहा था। लेकिन उसे मोबाइल नंबर जरूर याद था। जब मोबाइल पर कॉल की गई तो वह उसके फूफा का निकला। की जानकारी पप्पु के फूफा को दी गई। उन्होंने बताया की उस नंबर पर बाद में फूफा को वीडियो कॉल की। फूफा देखकर पप्पू को रोने लगे।
लेकिन यह भिखारी पागल नहीं था लेकिन उस रास्ते से आते जाते लोग ध्यान नहीं देते लोग जान रहे थे। की यह पागल है लेकिन बाद में पता चला की यह पागल नहीं है। बल्कि इसके माता -पिता के मौत के बाद मानसिक सन्तुल खो को बैठा और घर से निकल पड़ा इस कारण लोग भिखारी समझ ध्यान नहीं देते थे। तब बाद में सुनील ने पूछा कुछ लेकिन वह अपने मानसिक सन्तुलन खो बैठा था। लेकिन वह 6 माह से भूखा पड़ा रहा लोग ऐसे आते जाते पर ध्यान नहीं देते लेकिन वह पूछने वाला व्यक्ती सुनील ही था। कुछ ऐसे कारनामे के बाद उसने कुछ बोला
भिखारी पप्पू के फूफा ने भी कॉल पर कुछ मदत की और विडिओ कॉल बात हुआ।
फूफा ने सुनील को बताया की उसके माता -पिता की मौत हो चुकी है। मौत के बाद वह मानसिक संतुलन खो बैठा। इसका इलाज भी कराया जा रहा था, लेकिन वह एक दिन अस्पताल से अचानक गायब हो गया। बाद में सुनील ने 108 नंबर पर कॉल कर एम्बुलेंस की मांग की, लेकिन एम्बुलेंस नहीं मिली। उसके बाद में पुलिस की मदद से कासना स्थित सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया। उसे कूड़े में भूखा प्यासा देखकर आस -पास के लोग गुजर जाते थे। लेकिन किसी ने उसकी परेशानी के बारे में जानने का प्रयास नहीं किया। सुनील के महज कुछ घंटे के प्रयास के बाद पप्पू अपने परिजनों तक पहुंच गया। इसके पहले भी सुनील सिंह पंजाब के रहने वाले अंग्रेज सिंह को उनके परिजनों से मिला चुके है।


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