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Monday, May 13, 2019

टाइम कवर पर फिर मोदी, सवाल- क्या सबसे बड़ा लोकतंत्र

पत्रिका ने बताया - फुट डालने वालो का मुखिया ?

नई दिल्ली-  अमेरिका पत्रिका टाइम ने अपने अंतरास्ट्रीय संस्करण के कवर पेज पर पीएम नरेंद्र मोदी की तस्बीर डालने वालो का मुखिया करार दिया है| इसे लेकर बिवाद खड़ा हो गया है कवर पेज पर ही कम महत्ता के साथ दूसरी हैडलाइन है| जिसमे मोदी द रिफ़ार्मर कहा गया है  आलेख लिखने वाले आतिश तासीर भारतीय पत्रकार तवलीन सिंह ओर पाकिस्तान के पंजाब प्रान्त के गवर्नर रहे सलमान  तासीर के बेटे है |

सलमान को ईशनिंदा कानून का बिरोध करने पर उनका ही अंगरक्षक  ने गोली मारकहर हत्या कर दी थी  आतिश ने लिखा - क्या बिस्व  का  सबसे बड़ा लोकतंत्र मोदी सरकार को पांच ओर साल झेल पाएगा ?'  मोदी ने 2014 मे मतभेदों को उम्मीद के माहौल मैं बदला था, लेकिन 2019  मे वे लोगो की मतभेदों को याद रख़ने ओर देश मे  फैली  हतासा को भूल जाने के लिए कह रहे है  पहले वे मसीहा थे' हिंदू पुनजागरण के साथ आर्थिक कार्यकर्म की बात करते हुए रोशन भबिस्य की उम्मीद जताते थे |अब वे फिर से चुने जाने की कोशिश कर रहे है|

2012,2015 15 मै मिली थी कवर पेज जगह ?

पीएम बनने के बाद 2015 ओर गुजरात के पीएम रहते 2012 मै भी मोदी 'टाइम ' के कवर पेज पर आ चूके है |

सुधारो की उम्मीद भी बताया 

  इस संस्करण मै मोदी द रिफ़ार्मर आलेख मै पत्रकार इयान ब्रेमर नै मोदी को भारत के लिए आर्थिक सुधारो को सबसे बड़ी उम्मीद बताया | उन्होने लिखा की आर्थिक मोर्चे पर मोदी का रिकार्ड मिला -जुला रहा | फिर भी भारत को बदलाव चाहिये तो मोदी ही वह ला सकता है |  चीन जापान ओर अमेरिका से सम्बंद तो सुधारे ही है घरेलू मोर्चे पर लाखो -करोड़ों लोगो के जीवन मै सुधर लाने के लिए ज्यादा काम किया | जीएसटी , आधारभूत संरचनाओं मै अभूतपूर्ण निवेश, काग्रेश के समय मै बनी आधार पहचान पत्र बेवस्था का बिस्तार , उनकी उपलब्धियो है | वे हावी तो होते है, लेकिन एक विकासशील देश को जो सुधर चाहिए, उन्हें उपलब्ध भी करवाते है |
सबसे बड़ा खुलाशा सुधारो की उम्मीद पै यह बताया जा रह है| की आलेख के पत्रकार भारत के लिए आर्थीक सुधारो की उम्मीद बताए जा रहे है | इस लिए यह उम्मीद का पार्टी मै राजनीतक सोच नहीं बची | 

कांग्रस की आलोचना ; प्रियंका को उतारने से ज्यादा सोच नहीं पाए ?
आलेख मै कांग्रेस की आलोचना मै कहा है की भारत की सबसे पुरानी पार्टी मै राजनीतीक सोच समझ नहीं बची है | बंशवादी राजनीती के अलावा कहने के लिए कोई बात नहीं है | पार्टी केवल  राहुल के साथ उनकी बहन प्रियंका को चुनाव मै उतारने जितना ही सोच सकती हैं | यह वैसा ही है जैसे अमेरिका मै अंगर डेमोक्रेटश हिलेरी किलंटन को राष्ट्पति चुनाव मै फिर से उतारे तो साथ मैं बेटी चेल्सी किलंटन को भी उपरास्तपति पद के लिए उतार कर उम्मीद करे की इससे मतदाता आकर्षित  होगा | मोदी का सोभाग्य है कि उन्हें ऐसा कमजोर बिपच्छ मिला है , जिससे पास गठजोड़ के अलावा मोदी को हराने के लिए कोई एजेडा है |

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